नमस्कार विद्यार्थी मित्रांनो,
पाचवी शिष्यवृत्ती परीक्षा ऑनलाइन टेस्ट - 23
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पाचवी शिष्यवृत्ती परीक्षा ऑनलाइन टेस्ट - 23
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म्हणजे संबंधित शब्द.
Tools (साधने)
Carpenter (सुतार )
Sow (करवत),
Power Drill,
Level (स्तर),
Tap measure (मापनासाठी टेप),
Screwdriver (पेचकस)
Jointer
Doctor (डॉक्टर )
Stethoscope,
Blood pressure (रक्तदाब यंत्र),
Bedpan (आजारी व्यक्तीचे मलपात्र),
Oxygen cylinder-ventilator
Barber (न्हावी )
Blade
Blade, Scissor (कात्री)
Comb (कंगवा),
Electric clipper,
Duster brush,
mirror (आरसा)
Potter (पॉटर ) कुंभार
Soil (माती),
Towel (टॉवेल),
Cut off wires,
Water (पाणी),
Wheel (चाक),
Oven (भट्टी)
Words related to Sky
Cloud (ढग),
Rainbow (इंद्रधनुष्य),
blue (निळा),
Earth (पृथ्वी),
Moon (चंद्र),
Weather (हवामान),
Sun (सूर्य),
Atmosphere (वातावरण),
Air (हवा),
Molecule (रेणू),
Plant (ग्रह)
planety
Farmer(शेतकरी )
Cattle (गाई-गुरे),
Crop (पीक),
Ranch (कुरण),
Ox (बैल),
Cow (गाय),
Farmland (शेतजमीन),
Grow (उगवणे),
Barn (गोदाम),
Hog (डुक्कर),
Plantation (वृक्षारोपण),
Timber (लाकूड),
Grain (धान्य)
Axe (कुऱ्हाड),
Hatchet (कुऱ्हाडी),
Sickle (कोयता),
Spade (कुदळ),
Shovel (फावडे),
Trowel (खुरपे),
Fork (काटा),
Rake
Painter (पेंटर )
Paint (रंग),
Brush,
Paint Roller,
Drop cloth,
Tray (ताट),
Crayons (रंगीत खडू),
Ladder (शिडी)
Mason (मेसन ) गवंडी
Chisel (छिन्नी),
Jointer (रंधा),
Squares (चौरस),
Mason's level,
Trowel (थापी),
Water level (पाणी पातळी),
Punch (मापे पाडण्याचे साधन),
Brick hammer (विटा तोडण्याची हातोडी)
Teacher ( टिचर ) शिक्षक
Chalk (चॉक)खडू
Blackboard (ब्लॅक बोर्ड )
Computer (कॉम्पुटर )
Teaching aid (शैक्षणिक साधने )
Visual aids (दृश्य साधने)
Duster (डस्टर )
Red pen (रेड पेनचालक )
Cook (कुक ) स्वयंपाकी
Pots (भांडे),
Pans (तवे),
Stove\Cooker,
Knife (चाकू),
Spoons (चमचा),
Grinder (जात्यावरचे पाते),
Mixer,
Ladles (मोठ्या पळ्या),
Oven (भट्टी)
Plants (प्लॅन्ट्स )वनस्पती,रोपे
Leaf (पान),
branch (फांदी),
Root (मूळ),
Stem (देठ),
Flowers (फूले),
Fruit (फळे),
Shrub (झुडूप),
Fungus (बुरशी),
Herb (औषधी वनस्पती),
Seeds (बिया)
Machines (मशिन्स ) यंत्रे
Car (कार),
Nut (बोल्ट),
Spanner (पाना),
Screwdriver (पेचकस),
Hammer (हातोडी),
Engineer (अभियंता),
Drive (चालवणे),
Tool (साधन),
Motor (कार)
Family (फॅमिली )कुटुंब
Mother (आई),
Relatives (नातेवाईक),
Love (प्रेम),
Son (मुलगा),
Daughter (मुलगी),
Uncle,
Grandfather,
Nephew (पुतण्या),
Niece (भाची),
Step-brother\sister (सावत्र भाऊ / बहीण),
Elder (वयाने मोठा),
Cousin brother (चूलत भाऊ),
Grandmother (आजी),
Couple (जोडी)
Water (वॉटर ) पाणी
Vapour (वाफ),
Hot (गरम),
Flood (पूर),
Cool (थंड), Rain (पाऊस),
thirsty (तहानलेला),
Lake (सरोवर),
Shower (पाण्याचे तुषार)
Games (गेम्स ) खेळ
Pitch (खेळपट्टी),
Football (फूटबॉल),
Dice (फासे),
Score (धावा),
Cricket (क्रिकेट),
Ball (चेंडू),
Indoor (घरातील),
Trophy (ट्रॉफी )
Umpire (पंच),
Captain (कर्णधार),
Player (खेळाडू)
Kho-Kho (खो -खो )
Gilli Danda (विटूदांडू),
Kabaddi (कबड्डी )
Langdi (लंगडी )
Basketball (बास्केटबॉल )
Football (फुटबॉल )
Golf (गोल्फ),
Marathon (धावणे शर्यत),
Soccer (फूटबॉल खेळाचा प्रकार) सकर
Boxing (बॉक्सिंग),
Volleyball (व्हॉलीबॉल),
Chess (बुद्धीबळ),
Badminton (बॅडमिंटन),
Tabletennis (टेबलटेनिस),
Carrom(कॅरम )
Grocery Shop (किराणा दुकान )
Oil (तेल),
Food (अन्न),
Supermarket,
Suger (साखर),
Grains (धान्य),
Sell (विकणे),
Salt (मीठ)
Books (पुस्तके )
Text,
Author,
Novel
5th Scholarship Online Test No.22
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पाचवी शिष्यवृत्ती परीक्षा ऑनलाईन टेस्ट क्रमांक - 22
महत्वाचे 25 प्रश्न - 50 गुणांसाठी
पाचवी शिष्यवृत्ती परीक्षा ऑनलाईन टेस्ट -21
5th Standard Scholarship Online Test -21
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Online Test No.21
पाचवी शिष्यवृत्ती परीक्षा ऑनलाईन टेस्ट नं.21
हिन्दी निबंध -
महंगाईः एक अभिशाप
मूल्यवृद्धी आज एक अंतर्राष्ट्रीय समस्या है, प्रत्येक देश का नागरिक इससे संत्रस्त है, क्योंकि वह अपनी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति भी नहीं कर पा रहा है।
इस लगातार मूल्य वृद्धि और महंगाई ने आम भारतीय को भी अत्यंत परेशान कर रखा है। दूध, दही, अनाज व दाल भी इतनी महंगी हो गई है कि संतुलित भोजन कर पाने में भी समर्थ नहीं हो पाता। सरकार भी महंगाई पर अंकुश लगा पाने में नाकाम साबित हुई है। केन्द्र तथा राज्य कर्मचारियों को प्रति छमाही में महंगाई भत्ता प्रदान कर दिया जाता किंतु अन्य लोगों की आय में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हो पाती। यही कारण है कि गरीब और गरीब होता जा रहा है। माता-पिता दिन-रात परिश्रम करके भी बच्चों को अच्छा भोजन व शिक्षा प्रदान नहीं कर पाते हैं। इस कारण उनमें भी निराशाएं घर कर जाती हैं।
महंगाई के इस भयावह सीमा तक बढ़ जाने के अनेक कारण हैं। प्रायः जब कोई देश अपने नव निर्माण में लगा होता है, तब कुछ सीमा तक दाम बढ़ते ही हैं। जीना महंगा और कठिन हो जाता है। उत्पादन और मांग के सिद्धांत के अनुसार जब मांग करने वाले अधिक होते हैं और उनका उत्पादन कम होता है, तब भी मूल्य वृद्धि होती है। इसी प्रकार अबाध दर से जनसंख्या का बढ़ते जाना व उसकी तुलना में उत्पादन व संसाधनों का नहीं बढ़ पाना भी महंगाई बढ़ने का मजबूत कारण है। भारत में महंगाई बढ़ने का मजबूत कारण जनसंख्या वृद्धि ही इसके अतिरिक्त जब देश की राष्ट्रीय आय द्वारा जन कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार होता है, तब भी महंगाई बढ़ती है। दुर्भाग्य से देश में लाखों करोड़ों के भ्रष्टाचार हुए हैं। इस कारण आय प्राप्त करने के लिए सरकार को नए कर लगाने पड़े हैं। इससे महंगाई को बल प्राप्त होता है। यह देश का दुर्भाग्य ही है कि भ्रष्टाचार ने देश में मजबूत जड़ें जमा ली हैं। इसे आप क्या कहेंगे कि कार्य करवाने के एवज में रिश्वत देना शिष्टाचार बन गया है। राजनीति का स्तर भी गिरता जा रहा है। इस कारण महंगाई पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा। भारतीय राजनीतिज्ञ भी महंगाई की समस्या के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार हैं। सत्ता की अदम्य लालसा के कारण वे नैतिक मूल्यों का ध्यान नहीं रखते हैं और अपने चहेतों को लाभ देने के लिए पद का दुरुपयोग करते हैं। देश में विदेशी निवेश बढ़ रहा है, इस कारण स्थानीय उद्योग-धंधे चौपट हो रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह रोजगार के साधनों में वृद्धि करे। जबकि देखा यह जा रहा है कि सरकार रोजगार के साधनों को कम रही है। राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में महंगाई फल-फूल रही है। भारतीय प्रजा को चाहिए कि वह अच्छे लोगों को संसद में भेजे, जो भ्रष्टाचार न करें। पार्टी को वोट न देकर व्यक्ति के चरित्रवान होने को वोट दिया जाना चाहिए। राजनेताओं के घोटालों ने देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करके रख दिया है।
देश की प्रजा का दोष यही है कि वह संस्कारवान लोगों को संसद में नहीं भेजती है। इस कारण भ्रष्ट राजनेता देश के आर्थिक संसाधनों के साथ मनचाहा भ्रष्टाचार करते हैं। अतः परिवर्तन आवश्यक है। यह परिवर्तन जागरूक जनता ही ला सकती है। बढ़ती महंगाई के रोग का इलाज जनता के हाथ में ही है। उसे समझदारी साहस और सतर्कता से काम लेकर भ्रष्ट व्यवस्था को उखाड़ना है। इसके बिना महंगाई से मुक्ति संभव नहीं। अतः उचित नेतृत्व का चयन करके और उन पर दबाव बनाए रखकर ही महंगाई से मुक्त हुआ जा सकता है।
हिन्दी निबंध
कंप्यूटरः आधुनिक जीवन का आधार
आज प्रत्येक मध्यम वर्गीय परिवार में एक कंप्यूटर दिख जाता है। अब आवश्यक माना जाने है। कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक साधन है जो आवृतिमूलक गणना को अत्यधिक शीघ्रता से करने में सक्षम है। कंप्यूटर आंकड़ों (सामग्री) को संसाधित करने का साधन है, जिसमें बहुत अधिक मात्रा में आंकड़ें संचित कर सकते हैं। यह सामग्री गद्य, तस्वीरें, आवाज, संख्याएं, छायाचित्र हो सकती हैं अथवा अन्य किसी भी प्रकार की सूचना, जो लोगों द्वारा प्रायः प्रयोग की जाती हैं। आज कंप्यूटर के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। वास्तव में प्रस्तुत सहस्त्राब्दि कंप्यूटर एवं इससे संबंधित तकनीकों, जिसे साधारणतयाः सूचना तकनीक कहते हैं का परिष्कृत रूप है।
कंप्यूटर विद्यार्थियों को शिक्षा, ग्राफिक, डिजाइनिंग, खेल एवं अन्य शैक्षिक विनियोगों की नवीन तकनीकें सीखने में मदद करता है। इससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को रिपोर्ट बनाने में भी मदद मिलती है। कार्यालय कर्मचारियों को कंप्यूटर गणना करने, सॉफ्टवेयर का विकास करने, बिक्री बीजक बनाने एवं निर्माण में मदद करता है। इससे पुस्तकालयों में काम सुचारू रूप से करने में मदद मिलती है। कंप्यूटर उपग्रह एवं परमाणु अस्त्रों को भी नियंत्रित करते हैं। यह इंटरनेट की विभिन्न साइट्स एवं सर्च करने (जाने) में हर उम्र के लोगों की विभिन्न रुचियों में सहायक बनता है। वास्तव में यह अनिवार्य है क्योंकि मानव जीवन का कोई भी कार्य इसके बिना अपूर्ण एवं अकुशल है।
विद्यालय जाने वाले विद्यार्थियों को कंप्यूटर जरूर सीखना चाहिए। आज कंप्यूटर विभिन्न स्वरूपों में उपलब्ध हैं।
कंप्यूटर संचालन सीखने के लिए 166 एम. एच. जेड. स्पीड (जिसे सीपीयू स्पीड के रूप में जानते हैं), 1.2 एम.बी. को भंडारण क्षमता का एच.डी.डी. एवं 32 एम. बी. के. आर.ए. एम. की आवश्यकता होती है। इन प्रारंभिक कंप्यूटरों से विद्यार्थी को लोगो, बेसिक, विंडो गेम्स एवं सितेबि से संबंधित विभिन्न लेक्चर व इंटरनेट संचालन में मदद मिलती है। यद्यपि भारतीय समाज, उद्योग एवं राज्यतंत्र कंप्यूटर के अभिग्रहण की ओर अग्रसर है, किंतु हम पश्चिमी देशों की बजाय कंप्यूटर साक्षरता में अभी बहुत पीछे हैं। अमेरिका में प्रत्येक दो विद्यार्थियों में से एक के पास कंप्यूटर है। भारत में दो सौ विद्यार्थियों में से केवल एक के पास ही कंप्यूटर है। इसके अतिरिक्त अमेरिका में प्रत्येक चार विद्यार्थियों में से दो को इंटरनेट की सुविधा प्राप्त है, जबकि भारत में पचास में केवल एक विद्यार्थी की पहुंच इंटरनेट तक है।
एक विद्यार्थी कंप्यूटर के मूल सिद्धांत बहुत शीघ्र सीख सकता है। वह अपने विद्यालय में सांध्य-कक्षाओं में प्रवेश लेकर अग्रवर्ती स्तर का कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता है। कंप्यूटर सीखना आसान है एवं यह विद्यार्थियों का अनुकूल क्षेत्र है। इससे विद्यार्थियों की कार्य-कुशलता में वृद्धि होती है एवं अधिक ज्ञान प्राप्त होता है। कंप्यूटर विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि करते हैं। उनकी शिक्षा में, मानसिक विकास में एवं मनोरंजन में उनके सहायक होते हैं।
आगामी समय में प्रत्येक विद्यार्थी के पास या तो अपना एक कंप्यूटर होगा या उसकी उस तक स्वतंत्र पहुंच होगी। बैंक पूरी तरह कंप्यूटरीकृत हो गए हैं व अधिकतर फैक्ट्रियां, कार्यालय, विश्वविद्यालय एवं विद्यालयों में अग्रवर्ती कंप्यूटर व्यवस्था हो चुकी है। कंप्यूटर की नवीनतम संसाधन स्पीड एम एच जेड 533 है, किंतु यह कंप्यूटर ज्यादा महंगा है। एक कंप्यूटर जो विद्यार्थी की आवश्यकताओं को पूर्ण कर सकता है, वह लगभग बीस हजार रुपए मूल्य का है। आने वाले एक वर्ष में कीमतें और भी कम हो जाएंगी। विद्यार्थियों को सामूहिक शिक्षा एवं बौद्धिक विकास के लिए कंप्यूटरों को अपनाना चाहिए। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक उज्ज्वल क्षेत्र है एवं विद्यार्थी इसमें प्रगति कर सकते हैं। अतिरिक्त प्रतिभाशाली प्रोग्रामर्स की अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड इत्यादि देशों में भी बहुत मांग है। कंप्यूटर के क्षेत्र में यदि विद्यार्थी कठिन मेहनत करते हैं तो आने वाले जीवन में वह अच्छी जीविका कमा सकते हैं। कंप्यूटर आज के युग की आवश्यकता बन गया है और इसे अपनाने के लाभ ही हैं, हानि कुछ भी नहीं।
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आज हम हिन्दी निबंध लिखेंगे,
विजयादशमी दशहरा
दशहरा (विजया दशमी)
दशहरा भी हिंदुओं का मुख्य त्योहार है। दशहरा आश्विन मास की दसवीं तिथि को मनाया जाता है। इस मास में गुलाबी ठंड का आगमन जाता है। यह माह अत्यंत मनोरम होता है। इस माह में न तो ज्यादा गर्मी होती है और न ही ज्यादा सर्दी पड़ती है।
दशहरे से दस दिन पूर्व रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है। दशहरे का महत्व रामलीलाओं के कारण बढ़ जाता है। भारत के प्रत्येक शहर एवं गांव में रामलीला का आयोजन होता है। दिल्ली में तो सभी कॉलोनियों में रामलीला होती हैं। किंतु दिल्ली गेट के करीब रामलीला मैदान की रामलीला सर्वाधिक प्रसिद्ध है। वहां पर दशहरे वाले दिन प्रधानमंत्री स्वयं रामलीला देखने आते हैं। उनके साथ दूसरे मंत्रीगण और अधिकारी भी होते हैं। उनके अतिरिक्त वहां हजारों लोगों की भीड़ होती है।समाज के सभी वर्ग के लोग रामलीला देखने आते हैं। इसमें वे प्राचीन संस्कृति के साथ अपना जुड़ाव दर्शाते हैं।
दशहरे के दिन मनोरंजक मेले का आयोजन भी होता है। उस दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतले प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। सच है कि ज्यादातर लोग तो इन्हीं पुतलों को देखने आते हैं। रामलीला के अतिरिक्त दशहरे के दिन आतिशबाजी दर्शनीय होती है जो दर्शकों का मन आकर्षित करती है। अनेक नगरों में तो आतिशबाजी की प्रतियोगिता भी होती है जिनमें आगरा नगर एक है। वहां पर कई नगरों से आतिशबाज आते हैं और जिसकी आतिशबाजी सर्वश्रेष्ठ होती हैं उसे पारितोषिक दिया जाता है। आतिशबाजी कार्यक्रम के बाद रामचंद्र जी रावण का संहार करते हैं। फिर बारी-बारी से पुतलों में अग्नि लगाई जाती है। प्रथमतः कुंभकर्ण का पुतला जलाया जाता है। उसके पश्चात् मेघनाद के पुतले में अग्नि लगाई जाती है और सबसे अंत में रावण के पुतले में अग्नि दी जाती है।
रावण का पुतला सबसे बड़ा बनता है। उसके दस सिर होते हैं, उसके दोनों हाथों में तलवार तथा ढाल होती हैं। रावण के पुतले को श्रीराम अग्निबाण से जलाते हैं। रावण के पुतले में अग्नि लगने के बाद सभी दर्शक अपने-अपने घरों को लौटने आरंभ हो जाते हैं।
भारतीय हिंदू समाज में दशहरे का दिन बहुत शुभ दिन माना जाता है। इस दिन श्रमिक लोग अपने-अपने काम के यंत्रों की पूजा करते हैं। वे लड्डू बांटकर प्रसन्नता प्रदर्शित करते हैं।
दशहरे का त्योहार असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की विजय भी कहा जाता है। इस दिन श्री राम ने बुराई के प्रतीक रावण का संहार किया था। अतः हमें भी अपनी बुराइयों को त्यागकर अच्छाइयों को स्वीकार करना चाहिए, तभी इस दिन की वास्तविक महिमा व गरिमा स्थापित हो सकती है।
आजच्या कार्यक्रमाचे अध्यक्ष, माननीय गुरुजन वर्ग आणि माझ्या मित्र-मैत्रिणींनो. आज आपल्या देशाचा 76 वा स्वातंत्र्य दिन साजरा करण्यासाठी आपण सर्वजण या शुभ दिवशी अतिशय उत्साहाने येथे जमलेलो आहोत.
15 ऑगस्ट 1947 रोजी भारताने इंग्रजांपासून स्वातंत्र्य मिळवले आणि जवळपास 150 वर्षांच्या पारतंत्र्यातून स्वतःला मुक्त केले. आपल्या देशाला हे स्वातंत्र्य काही सहज मिळालेले नाही. यासाठी कित्येक क्रांतिकारकांनी आपले रक्त सांडले आहे, कित्येकांनी आपल्या निधड्या छातीवर इंग्रजांच्या गोळ्या झेलल्या आहेत आणि अशा पद्धतीने आपले संपूर्ण जीवन देशासाठी अर्पण केले आहे. अतिशय कष्ट आणि जिद्दीने भारताने सुमारे कित्येक वर्षे आपल्या स्वातंत्र्यासाठी लढा दिला. अशा कठीण काळातून गेलेल्या सर्व महान क्रांतिकारकांचे आज स्मरण करूया आणि त्यांना श्रद्धांजली अर्पण करूया. इंग्रजांच्या राजवटीत आपल्या महान पूर्वजांनी सामोरे गेलेल्या कठीण प्रसंगांचा आणि त्यांच्या संघर्षांचा आपल्याला विसर पडू नये म्हणून प्रत्येक स्वातंत्र्यदिनी आपण केवळ झेंडावंदन आणि स्वातंत्र्य दिन साजरा न करता देशासाठी प्राण अर्पण करणाऱ्या सर्वच वीरांना आदरांजली वाहत असतो.
या शुभ दिनी शाळा आणि महाविद्यालयांमध्ये विद्यार्थी देशभक्तीपर गीतांचे सादरीकरण करतात. ही गाणी ऐकून देशभक्ती आणि राष्ट्र प्रेमाच्या भावनेने आपले हृदय भरून येते. सरकारी कार्यालयांमध्ये हा दिवस सुट्टीचा असतो परंतु तरीही सर्वच कर्मचारी आणि अधिकारी देशाच्या तिरंगी ध्वजाला मानवंदना देण्यासाठी एकत्रित येतात.
आपल्या राष्ट्रीय ध्वज तिरंग्यात केशरी, पांढरा आणि हिरवा असे तीन रंग आहेत. केशरी रंग ,त्याग आणि शौर्याचे प्रतीक आहे. पांढरा रंग सत्य, शांती आणि पवित्रता दर्शवतो. तसेच हिरवा रंग समृद्धीचे प्रतीक म्हणून मानला जातो. याचबरोबर तिरंग्यामध्ये एक अशोक चक्र सुद्धा आहे, ज्यात 24 आरे असतात. स्वातंत्र्यदिनी शाळा कॉलेज शासकीय आणि प्रशासकीय अशा सर्वच ठीक ठिकाणी तिरंगी ध्वज फडकवला जातो.
याशिवाय विविध कार्यालयांमध्ये अधिकारी आणि कर्मचारी स्वातंत्र्य लढ्याबद्दल लोकांना प्रबोधन करण्यासाठी भाषणे व माहिती देतात.
देशात बदल घडवण्याची प्रचंड शक्ती आपल्या देशातील तरुण पिढीत आहे. कोणत्याही देशाचे भविष्य हे त्या देशातील तरुण पिढीवरच अवलंबून असते. म्हणून देशाची सेवा करणे आणि देशाच्या विकासासाठी सर्वतोपरी प्रयत्न करणे हे आपले म्हणजेच तरुण पिढीचे कर्तव्य आहे.
स्वातंत्र्यदिनी दरवर्षी नवी दिल्लीत राजपथ येथे मोठा उत्सव असतो. जिथे पंतप्रधानांनी ध्वजारोहण केल्यानंतर राष्ट्रगीत गायले जाते. तसेच राष्ट्रगीतासह 21 तोफा डागून राष्ट्रध्वजाला मानवंदना देण्यात येते आणि हेलिकॉप्टर मधून पुष्पवृष्टीही करण्यात येते. सर्व सेना स्वतंत्र दिनाच्या परेडमध्ये भाग घेतात आणि आपल्या महान भारत देशाला वंदन करतात.
आपला भारत महान का आहे? पुढच्या काही वर्षात आपण लोकसंख्येच्या बाबतीत चीनला मागे टाकणार आहोत म्हणून ? की आपल्या देशात सामाजिक समस्या, गरिबी, निरक्षरता,दहशतवाद अजूनही मोठ्या प्रमाणात आहे यामुळे ? तर नाही! आपला देश महान आहे कारण "वसुधैव कुटुंबकम" अर्थात 'संपूर्ण जग एक कुटुंब आहे ' अशी संस्कृती असणारा आपला देश आहे. " सर्वे भवन्तु सुखी नहा सर्वे संतु निरामया " ही आपल्या देशाची शिकवण आहे
. पहिल्याच प्रयत्नात मंगळावर पोहोचणारा भारत एकमेव देश आहे. एक तो दिवस होता जेव्हा 1963 मध्ये आपले पहिले रॉकेट एका सायकलीवर आणण्यात आले होते आणि आज तीच 'इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनायझेशन ' म्हणजेच 'इस्रो ' जगातल्या सर्वात यशस्वी अंतराळ संस्थांपैकी एक आहे.
नुकतेच भारताने चंद्रयान मोहीम फत्ते केलेली आहे.
"There is no country more diverse than India. " रंगांचा देश- जिथे रोज एक नवीन सण असतो.आपली कला,संस्कृती,सभ्यता इतकी समृद्धशाली आहे की 5000 वर्षांपूर्वी जेव्हा जगभरात लोक उपासमारीने मरत होते तेव्हा भारतात हडप्पा आणि सिंधू सभ्यता उन्नतीच्या शिखरावर होत्या. ऋग्वेद जगातला सर्वात प्राचीन लिखित ग्रंथ आहे. भारतीय संस्कृती आणि वेदांनी हजारो वर्षांपूर्वीच बिंदू,शून्य संख्याप्रणाली, नौकानयनशास्त्र, दिनदर्शिकेपासून नृत्य, गायन, वादन आणि सर्व कलांसोबतच अध्यात्म, खगोलशास्त्र, साहित्य विज्ञान,अभियांत्रिकी,गणित,शेती व्यवसाय,वैद्यकीय विज्ञान तसेच अंतराळ विज्ञानापर्यंतचे लिखित प्रमाणित ज्ञान दिले आहे.
विश्वातील सर्वाधिक प्राचीन शहरे भारतात आहेत. भारतातील सुवर्ण मंदिर जगभरात प्रसिद्ध धार्मिक स्थळ आहे. या ठिकाणी जात, धर्म, वर्ग, वय या गोष्टी न बघता दररोज जवळपास एक लाख लोकांना श्रद्धेने जेवण दिले जाते. असा देश जिथे जगातील सर्वाधिक अशा तीन लाखांपेक्षा जास्त मशिदी आहेत. कुंभमेळ्यात एका वेळी पंधरा कोटींपेक्षा जास्त भक्त असतात. भारतात मनाला शांती देणारे बुद्धांचे विचार आहेत. अनेकतेमध्ये एकतेची यापेक्षा सुंदर कल्पना जगात कुठेच नसेल.
जगातले 75 टक्के वाघ भारतात आहे. त्याचबरोबर भारताचे लोहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल यांचा नर्मदा नदीच्या लहानशा तीरावर बनवलेला जगातील सर्वात उंच पुतळा, जगातील सर्वात मोठी शाळा, सर्वात उंच क्रिकेटचे मैदान, तरंगते पोस्ट कार्यालय, जगातील सर्वात स्वस्त चार चाकी, जगातील सर्वात मोठा रेल्वे पूल, जगातील पहिली हॉस्पिटल ट्रेन भारताची शोभा वाढवत आहेत. भारतात जेवढे लोक दररोज ट्रेनने प्रवास करतात तेवढी तर ऑस्ट्रेलियाची लोकसंख्या आहे. जगभरात जेवढे सोने आहे त्यातले 11 टक्के भारतीय महिलांकडे आहे. जगात सर्वात जास्त महिला वैमानिक भारतात आहेत. सर्वांना आपल्या देशात त्यांचा हक्क मिळतात. जगातील सर्वात मोठा मसाल्यांचा उत्पादक देश भारत जिथे जगातील 25% डाळींचे उत्पादन केले जाते. कित्येक मोठमोठ्या कंपन्यांचे सीईओ भारतीय आहेत.
मायक्रोप्रोसेसर, पेंटियम चीफ,ऑप्टिक फायबर,रेडिओ वायरलेस, कम्युनिकेशन तसेच जगातील सर्वात लहान सॅटेलाइट भारताने बनवली आहे
या सर्व गोष्टी त्या देशाची देन आहेत,जिथे जात, धर्म,भाषा, बोली वेगवेगळे आहे.तरीही आहे सर्वांचा सन्मान. उत्तर ते दक्षिण आणि पूर्व ते पश्चिम संपूर्ण एकच हिंदुस्तान. जगातील सर्वात जलद सुपरसोनिक मिसाईल ब्रह्मोस आणि न्यूक्लिअर ताकद असलेला देश ज्याने त्याच्या एक लाख वर्षाच्या इतिहासात कधीच कोणावर पहिला हल्ला केला नाही, तो इतिहास आहे भारत. जगातील सर्वात वेगाने वाढणारी अर्थव्यवस्था जिथे जगातील सर्वात मोठी तरुणाई राहते. त्या तरुणांच्या रक्तात वाहणारा लाल रंग आहे भारत. जगातील सर्वात मोठी लोकशाही जिथे देव फक्त आकाशात राहत नाहीत तर सीमेवर राहतात, ज्यांना आपण जवान म्हणतो. जे 53 अंश सेल्सिअस थंडीत आणि 52 अंश सेल्सिअस गरमीत ही सीमेवर तैनात राहून देशाचे रक्षण करतात आणि आपल्या देशासाठी हसत हसत प्राणांचे बलिदान देतात. ते जवान हे सैनिक आहेत भारत. असा देश जिथे देशाला देव नाही तर माता- भारतमाता म्हटले जाते.
अशा महान देशात आपण राहतो याचा आपल्याला अभिमान असला पाहिजे.
हे राष्ट्र देवतांचे, हे राष्ट्र प्रेषितांचे
आचंद्र सूर्य नांदो, स्वातंत्र्य भारताचे
कर्तव्यदक्ष भूमी, सीता रघुतमाची
रामायणे घडावी, येथे पराक्रमाची
शिर उंच उंच व्हावे, हिमवंत पर्वताचे
आचंद्र सूर्य नांदो, स्वातंत्र्य भारताचे
जय हिंद!भारत माता की जय!
मराठी निबंध
माझा आवडता महिना श्रावण
ऋतुच्या चक्रांनी निसर्ग आपली विविध रूपे या सृष्टीला दाखवीत असतो. सृष्टीवर विविध बदल होणे हा कालचक्राचा नियम आहे. या कालचक्रात बारा महिन्यांचे नानाविध रंग आपणास दिसून येतात. चैत्रात वृक्षांना पालवी फुटते आणि त्या नव्या बदलाची लोकांना मोहिनी पडते, कुणाला वैशाख वनवा आवडतो कुणाला मेघ शाम आषाढ हवाहवासा वाटतो तर कोणी सोनेरी अश्विनसाठी झुरतात.
मला मात्र हिरव्या रंगाच्या विविध छटा उधळणारा श्रावण मासच आवडतो. किती ते रंग,! कधी दाट हिरव्या रंगात रंगलेली छटा तर कधी हिरवी ते कधी पोपटी हिरव्या रंगाची सृष्टी, जिला बघून बालकवी म्हणतात,
श्रावण मासी हर्ष मानसी, हिरवळ दाटे चोहिकडे
क्षणात येते सरसर शिरवे, क्षणात फिरुनी ऊन पडे l
खरंच ऊन पावसाचा हा पाठ शिवनीचा खेळ नाचरे मोर कोणाला बरे आवडणार नाहीत? आणि यावर कळस म्हणजे आकाशात सप्तरंगांची उधळण करणारे इंद्रधनुष्य. ज्याला बघून कुसुमाग्रज म्हणतात,
हसरा नाचरा
जरासा लाजरा
सुंदर साजरा
श्रावण आला l
श्रावणात माणसांनाच काय पण पशुपक्ष्यांना पाना फुलांना एका नव्या हर्षाने मोहित केलेले असते. शेतातील वाऱ्यावर डोलणारी पिके पाहून शेतकरी आनंदाने नव्या भविष्यांची स्वप्न पाहत आपल्या सुखमय जीवनाची कल्पना रचताना त्या भगवान शंकराची मनोभावे पूजा करतो. श्रावणात विविध धार्मिक प्रथा पाळल्या जातात. या महिन्यात येणाऱ्या प्रत्येक वाराचे महत्त्व वेगळे मग तो सोमवार महादेवाचे आराधना करून तर मंगळवारी मंगळागौरीची पूजा मांडतात. एकीकडे निसर्ग आपले सौंदर्य बरसवत असतो. आपली कोळी बांधव श्रावणात निसर्गाचा आदर राखत प्रचंड लाटांनी खवळलेल्या सागराला नारळी पौर्णिमेला नारळ वाहून शांत करतात. बहिण भावाला राखीच्या पवित्र बंधनाने बांधून आजन्म आपल्या रक्षणाची ओवाळणी मागते, नागपंचमीला नागदेवतेची पूजा केली जाते.
असा हा आनंदाची चौफेर उधळण करणारा बारा मासातील पाचवा मास श्रावण मास प्रत्येकाच्या आयुष्यात नव्या सुख स्वप्नांची नांदी घेऊन येतो. अवघी सृष्टीचे रूपच बदलून टाकतो. ज्याला पाहून नव्या उमेदीने आणि चैतन्याने उभे राहण्याची स्फूर्ती मिळते. प्रत्येक जीवाला दिलासा मिळत असतो. सर्वसृष्टी सुंदर हिरव्या गालीच्याने नटलेली दिसते, म्हणून मला हा श्रावण महिना खूप आवडतो.
एकाच शब्दाचे भिन्न अर्थ शोधणे
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नमस्कार विद्यार्थी मित्रांनो, शिष्यवृत्ती परीक्षा, प्रज्ञाशोध परीक्षा यांसाठी उपयुक्त माहिती. एकाच शब्दाचे भिन्न अर्थ शोधणे.
शब्द एकच मात्र त्याचे वेगवेगळे अर्थ असणे ही एक भाषेतील गंमतच म्हणावी लागेल. खालील शब्द व त्याचे भिन्न अर्थ समजून घ्या व वाक्यरचनेनुसार शब्दांचे योग्य अर्थ लावा.
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शब्द - वेगवेगळे अर्थ
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अनंत - अमर्याद,परमेश्वर
अभंग- न भंगलेला,काव्यरचनेचा एक प्रकार
आस - इच्छा, गाडीच्या दोन चाकांना जोडणारा कणा
अक्षर - पूर्ण उच्चाराचा वर्ण, अविनाशी
अंग - शरीर,भाग,बाजू.
कर - हात,किरण,एक क्रियापद
कसर - सूट,कमीपणा,एक किडा
कोळी - मासे पकडणारा,जाळे विणणारा किडा
काळ - मृत्यू, वेळ
कर्ण - कान, महाभारतातील योद्धा,त्रिकोणातील काटकोना समोरील बाजू
काप - तुकडा, कंप
खडा - उभा, लहानसा दगड
खोड - मस्ती,झाडाचा बुंधा
गुण - चांगल्या सवयी, दोरी
घाट - नदीवर बांधलेल्या पायऱ्या, डोंगरातील रस्ता
चिरंजीव - मुलगा,दीर्घायुषी
जलद - ढग,त्वरेने
जीव - प्राणी,प्राण
तीर - नदीचा काठ, बाण
अंतर - लांबी,मन,भेद
ओढा - मनाचा कल,पाण्याचा लहान ओघ
अर्थ - पैसा,आशय
अंक - मांडी,आकडा(संख्या)
अंबर - आकाश,वस्त्र
काच - जाच,पारदर्शक पदार्थ
काम - इच्छा, कर्तव्य
कोरडा - सुका,चाबकाचा फटकारा
कळ - भांडणाचे कारण, गुप्त किल्ली, वेदना
खोड - सवय, झाडाचा बुंधा
खल - दुष्ट , कुटण्याचे साधन
गदा - संकट, शस्त्र
गंध - वास,कपाळावरील टिळा
चपला - वीज, वाहाणा
जीवन - आयुष्य,पाणी
जागा - ठिकाण,जागृत
डाव - कारस्थान,कपट,खेळी
तळी- तलाव,ताम्हण
तट - कडा,किनारा,किल्ल्याची भिंत
दल - पाकळी, संघटना
ध्यान - मनन,चिंतन, भोळसट व्यक्ती
नाव - होडी,कशाचेही नाव
पात्र - भांडे, नदीचे पात्र, नाटकातील पात्र
पार - झाडाच्या भोवतालची जागा, पलीकडे
पत्र - चिठ्ठी,पान
पक्ष - भाग,श्राद्ध,बाजू,राजकीय संघटना
पट - वस्त्र, कुस्तीतला एक डाव
भेट - भेटणे,नजराणा
माया - धन,ममता
मान - शरीराचा एक भाग, मोठेपणा
वर - श्रेष्ठ,पती,आशीर्वाद
वाणी - वाचा, व्यापारी
वल्ली - स्वच्छंदी,व्यक्ती,वेल
वाली - वानराचे नाव,रक्षणकर्ता
शिळा - जुना, मोठा दगड
सूत्र - दोरी,धोरण
सूत - धागा, सारथी
किताब - पदवी,पुस्तक
हवा - वारा,पाहिजे
द्विज - पक्षी,ब्राह्मण
दंड - शरीराचा भाग,शिक्षा, काठी
धड - अखंड, माने खालील शरीराचा भाग
नाद- छंद,आवाज
पूर - पाण्याचा पूर, नगर
नाग - सापाची जात,हत्ती
पय - पाणी, दूध
पर - परका,पीस, परंतु
भाव - भक्ती,किंमत,भावना
माळ - फुलांची माळ,ओसाड जमीन
मात्रा - उपाय, औषध, गोळी
माठ - पाण्याचे भांडे,एक प्रकारची भाजी
वजन- तराजूचे वजन,वचक
वात - वारा, दिव्यातील वात
वारी - पाणी, यात्रा
विभूती - अंगारा, रक्षा, भस्म
शृंग - डोळे, शिंग, शिखर
सुमन - पवित्र मन, फूल
हार - पराभव, फुलांचा हार
कोट - किल्ला,अंगरखा
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धन्यवाद !
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उच्च प्राथमिक शाळा शिष्यवृत्ती परीक्षा (इयत्ता ५ वी) व माध्यमिक शाळा शिष्यवृत्ती परीक्षा (इयत्ता ८ वी) यांच्या शिष्यवृत्तीच्या रक्कमेमध्ये करण्याबाबत... वाढ
महाराष्ट्र शासन
शालेय शिक्षण व क्रीडा विभाग
शासन निर्णय क्रमांक:-- प्रमाशि- २०२०/प्र.क्र.३१/ एसडी-५ मंत्रालय विस्तार भवन, मुंबई ४०००३२
संदर्भ :-
दिनांक :- ०३ जुलै २०२३१)
शालेय शिक्षण व क्रीडा विभाग, शासन निर्णय क्र. एसएसजी/१३५३. दि.२.०४.१९५४ २) शासन निर्णय क्रमांक एससीएच-१०९५ (८४/९५)/माशि -८, दि. २.८.१९९५
३) शासन निर्णय क्रमांक एससीएच-२००५/१३९/०५)/केपयो, दि. १४.०२.२००७
४) शासन निर्णय क्रमांक एससीएच-२००९/ (९०/०९)/केपुयो, दि. २२.७.२०१०
(५) शासन निर्णय क्रमांक एफईडी- ४०१४/६४३/प्र.क्र. ४ / एसडी-५, दि. २९.६.२०१५ ६) शासन निर्णय क्रमांक एफईडी-४०१४/६४३/प्र.क्र. ४ / एसडी-५, दि. १५.११.२०१६ ७) शिक्षण संचालक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक, महाराष्ट्र राज्य, पुणे यांचे दि.२२.०४.२०२०
रोजीचे पत्र क्रमांक शिसमा / इ. ५ वी व इ. ८ वी / शिसंच.ए-४/१३८१
प्रस्तावना :-
राज्यातील गुणवान विद्यार्थ्यांना शिक्षणासाठी तसेच स्पर्धात्मकतेसाठी प्रोत्साहीत करणे हा शिष्यवृत्ती परीक्षेचा मुळ गाभा आहे. राज्यातील शिष्यवृत्ती परीक्षेला विशिष्ट असा दर्जा आहे. शिष्यवृत्ती मिळविणे ही विद्यार्थ्यांमध्ये प्रतिष्ठेची बाब मानली जाते. राज्यातील ग्रामीण तसेच शहरी भागातील गुणवान विद्यार्थ्यांना शिक्षण घेण्याकरीता अधिकाधिक प्रोत्साहीत करण्याच्या उद्देशाने दि. २.४.१९५४ रोजीच्या शासन निर्णयानुसार राज्यामध्ये शिष्यवृत्ती परीक्षेचे आयोजन करण्यात येते. २. शालेय शिक्षण विभागाच्या दि.०२.०८.१९९५ रोजीच्या शासन निर्णयानुसार उच्च प्राथमिक करीता ३९५४ व माध्यमिक करीता ३८१४ संच मंजुर होते. शालेय शिक्षण व क्रीडा विभागाच्या दि. १४.०२.२००७ रोजीच्या शासन निर्णयानुसार शिष्यवृत्तीच्या दरामध्ये व संचामध्ये वाढ करून, उच्च प्राथमिक शिष्यवृत्तीचे ७९०८ व माध्यमिक शिष्यवृत्तीचे ७६२८ इतके संच मंजूर करण्यात आले. शालेय शिक्षण व क्रीडा विभागाच्या दि. २२.०७.२०१० रोजीच्या शासन निर्णयान्वये सन २००९-२०१० या शैक्षणिक वर्षापासून शिष्यवृत्तीच्या दरामध्ये व संचामध्ये वाढ करण्यात आली आहे.
उच्च प्राथमिक शिष्यवृत्तीचे १६६८३ व माध्यमिक शिष्यवृत्तीचे १६२५८ संच मंजूर करण्यात आले आहेत.
३. सद्यस्थितीत एते के या संचानुसार उच्च प्राथमिक शिष्यवृत्ती करीता १६६८३ संच मंजुर असून यांकरीता संचनिहाय किमान रु. २५०/- प्रतिवर्ष ते कमाल रू. १०००/- प्रतिवर्ष एवढी शिष्यवृत्तीची रक्कम अदा करण्यात येते. तसेच माध्यमिक शिष्यवृत्तीचे १६२५८ संच मंजुर असून यांकरीता संचनिहाय किमान रु. ३००/- ते कमाल रू. १५००/- प्रतिवर्ष एवढी शिष्यवृत्तीची रक्कम अदा करण्यात येते.
४. उच्च प्राथमिक शिष्यवृत्ती परीक्षा (इयत्ता ५ वी पास झाल्यानंतरच्या वर्षापासून ३ वर्षाकरीता व माध्यमिक शाळा शिष्यवृत्ती परीक्षा (इयत्ता ८ वी पास झाल्यानंतरच्या वर्षापासून २ वर्षाकरीता शिष्यवृत्ती देण्यात येते. तथापि, विद्यार्थ्यांना सद्यस्थितीत देण्यात येणारी शिष्यवृत्तीची रक्कम कमी असल्याने तसेच सदर शिष्यवृत्तीच्या रक्कमेमध्ये गेल्या १३ वर्षांच्या कालावधीमध्ये वाढ करण्यात आली नसल्याने विद्यार्थ्यांच्या शिष्यवृत्तीच्या रक्कमेमध्ये वाढ करण्याची बाब शासनाच्या विचाराधीन होती.
शासन निर्णय :-
१. "उच्च प्राथमिक शाळा व माध्यमिक शाळा शिष्यवृत्ती परीक्षा योजना" या योजनेच्या शिष्यवृत्तीच्या रक्कमेमध्ये वाढ करून ती उच्च प्राथमिक शाळा (इयत्ता ५ वी) सर्व संचांकरीता रु. ५००/- प्रतिमाह प्रमाणे (रु. ५०००/- प्रतिवर्ष) व माध्यमिक शाळा (इयत्ता ८ वी) सर्व संचाकरीता रू. ७५०/- प्रतिमाह प्रमाणे (रु. ७५००/- प्रतिवर्ष इतकी निश्चित करण्यास मान्यता देण्यात येत आहे.
२. शिष्यवृत्तीचे सुधारीत दर सन २०२३-२४ पासून लागू राहातील.
३. उच्च प्राथमिक शाळा व माध्यमिक शाळा शिष्यवृत्ती परीक्षा योजना" या योजनेच्या अटी व शर्तीमध्ये कोणताही बदल करण्यात येत नसून केवळ शिष्यवृत्तीची रक्कम वाढविण्यास मान्यता देण्यात येत आहे.
४. शालेय शिक्षण व क्रीडा विभागाच्या दिनांक २२.०७.२०१० रोजीच्या शासन निर्णयाचे सहपत्र ई व एफ मध्ये नमूद संच एच (H) व संच आय ) करीता लागू असलेली रु.२०,०००/- पेक्षा कमी वार्षिक उत्पन्न याबाबतची उत्पन्न मर्यादा काढण्यात येत आहे.
५. सदर योजनेकरीता आयुक्त (शिक्षण), महाराष्ट्र राज्य, पुणे यांना नियंत्रक अधिकारी म्हणून घोषित करण्यास तसेच लेखाधिकारी (लेखा), शिक्षण संचालनालय योजना, महाराष्ट्र राज्य,पुणे यांना आहरण व संवितरण अधिकारी म्हणून घोषित करण्यास मान्यता देण्यात येत आहे. ६. या बाबींवर होणारा खर्च त्या त्या शिष्यवृत्त्यांखाली दर्शविण्यात आलेल्या लेखाशिर्षाखाली मंजूर तरतूदीतून भागविण्यात यावा.
२२०२, सर्वसाधारण शिक्षण, ०२ माध्यमिक शिक्षण १०७, शिष्यवृत्त्या, (०१)
माध्यमिक शाळांमधील शिष्यवृत्त्या (०१) (०१) ग्रामीण भागातील प्रज्ञावंत
विद्यार्थ्यांना राष्ट्रीय शिष्यवृत्ती (२२०२०३४२).
२२०२, सर्वसाधारण शिक्षण, ०२ माध्यमिक शिक्षण १०७, शिष्यवृत्त्या (०३) शिष्यवृत्त्या, (०३) (०२) प्रज्ञावंत विद्यार्थ्यांना सहाय्य (२२०२०३८९). २२०२, सर्वसाधारण शिक्षण, ०२, माध्यमिक शिक्षण १०७, शिष्यवृत्त्या, (०२) (०१) महाराष्ट्र जिल्हा परिषद व पंचायत समिती अधिनियम, १९६१ च्या कलम १८२ अन्वये जिल्हा परिषदांना सप्रयोजन अनुदाने (उच्च माध्यमिक शाळा ) (२२०२२३१८) 间
शासन निर्णय क्रमांक: प्रमाशि- २०२० / प्र.क्र.३१/ एसडी-५
iv) २२०२, सर्वसाधारण शिक्षण, ०२, माध्यमिक शिक्षण १०७, शिष्यवृत्त्या, (०१) माध्यमिक शाळांमधील शिष्यवृत्त्या (०१) (०२) खुली गुणवत्ता शिष्यवृत्ती. (पुर्व माध्यमिक शाळा) (२२०२०३५१)
19. सदर शासन निर्णय मा. मंत्रीमंडळाच्या दि. १३ जून २०२३ रोजीच्या बैठकीमध्ये दिलेल्या
मान्यतेनुसार निर्गमित करण्यात येत आहे. ८. सदर शासन निर्णय महाराष्ट्र शासनाच्या www.maharashtra.gov.in या संकेतस्थळावर
उपलब्ध करण्यात आला असून त्याचा संकेतांक २०२३०७०३१७०७०६२६२१ असा आहे. हा आदेश डिजीटल स्वाक्षरीने साक्षांकित करून काढण्यात येत आहे.
महाराष्ट्राचे राज्यपाल यांच्या आदेशानुसार व नावाने.
गुरुपौर्णिमेनिमित्त अतिशय सुंदर भाषण
माननीय मुख्याध्यापक, सर्व शिक्षक वर्ग आणि इथे जमलेल्या माझ्या प्रिय मित्र मैत्रिणींनो,आज आपण "गुरुपौर्णिमा " साजरी करण्यासाठी एकत्र जमलो आहोत .त्याविषयी मी तुम्हाला काही दोन शब्द सांगत आहे, ते तुम्ही शांतचित्ताने ऐकावे,अशी मी नम्र विनंती करतो.
" गुरुर्ब्रम्हा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरा,
गुरु साक्षात परब्रम्ह तस्मै श्री गुरवे नमः! "
' आषाढ शुद्ध पौर्णिमा' हा दिवस गुरुपौर्णिमा म्हणून साजरा करतात. हाच दिवस "व्यासपौर्णिमा " म्हणूनही ओळखला जातो.कारण याच दिवशी 'व्यास ऋषींनी' महाभारताचे लेखन केले होते.पौर्णिमा म्हणजे प्रकाश. गुरु ज्ञान देतात.ते ज्ञानाचा प्रकाश आपल्या सर्वांपर्यंत पोहोचवतात. म्हणून गुरूंविषयी कृतज्ञता व्यक्त करण्याचा हा दिवस.
माणूस हा सर्व प्राणीमात्रांमध्ये श्रेष्ठ समजला जातो. कारण माणसाजवळ विद्या आहे.ही विद्या देण्याचे काम गुरुच करतात. आपला पहिला गुरु म्हणजे आपले आईवडील.आणि दुसरा गुरु म्हणजे शाळेतील शिक्षक. ज्याप्रमाणे मातीच्या गोळ्याला कुंभार आकार देतात,हीच भूमिका शिक्षक शाळेत पार पाडतात. गुरु शाश्वत ज्ञान व कीर्ती देतात.
आईच्या शब्दाप्रमाणे 'गुरु ' या शब्दालाही मर्यादा नाहीत. गुरु शिवाय तरणोपाय नाही. ज्याप्रमाणे सागराच्या गलबताला योग्य दिशा दाखवण्यासाठी होकायंत्र हवे.ते नसेल तर गलबत भरकटेल.तसेच या मायावी जगात जन्माला येणाऱ्या प्रत्येक मानवास योग्य दिशा दाखवण्यासाठी गुरु हवाच नाहीतर माणूस भरकटेल. त्याचा जन्म वाया जाईल.
संत ज्ञानेश्वर,संत कबीर यांसारख्या थोर संतांनीही आपल्या कर्तृत्वाचे श्रेय आपल्या गुरूंना दिले आहे.वाल्मिकींचा आदर्शवाद, व्यासांचा व्यवहारवाद द्रोणाचार्य यांची कर्तव्यनिष्ठा आजही गौरवली जाते.
छत्रपती शिवाजी महाराजांचे गुरु त्यांच्या आई जिजाऊ,सचिन तेंडुलकर यांचे गुरु रमाकांत आचरेकर,लता मंगेशकर यांचे गुरु दिनानाथ मंगेशकर अशी भारतीय संस्कृतीतील गुरु शिष्य परंपरा आजही पाहायला मिळते.
भारतीय संस्कृतीत गुरूला अतिशय महत्त्व दिले आहे गुरु म्हणजे निष्ठा,
गुरु म्हणजे श्रद्धा,
गुरु म्हणजे भक्ती,
गुरु म्हणजे विश्वास,
गुरु म्हणजे वात्सल्य,
गुरु म्हणजे आदर्श,
गुरु म्हणजे अमर्याद ज्ञान.
हेच ज्ञान आपण चांगल्या प्रकारे आत्मसात करून पुढच्या पिढीपर्यंत पोहोचवणे हाच गुरुऋण फेडण्याचा मार्ग आहे.
आज पर्यंत कळत नकळतपणे ज्ञान देणाऱ्या सर्वांना आजच्या गुरु पौर्णिमेच्या दिवशी माझे वंदन!
एवढे बोलून मी माझी भाषण संपवतो
धन्यवाद!
*पाचवी शिष्यवृत्ती परीक्षा *
संख्याज्ञान :
आंतरराष्ट्रीय संख्या चिन्हे
देवनागरी संख्याचिन्हे
रोमन संख्याचिन्हे
संपूर्ण स्पष्टीकरणासहित